नन्हा राजकुमार


                        नन्हा राजकुमार

 लेखक:- सेंट एक्सुपरी (सेंट-एक्सुप्री ) 

सन्- 1943 में प्रकाशित

 द लिटिल प्रिंस (नान्हा प्रिंस)   सेंट-एक्सुप्री ने इस उपन्यास को लिखा और चित्रित किया है। यह कहानी एक युवा राजकुमार का पीछा करती है। 

जो पृथ्वी सहित अंतरिक्ष में विभिन्न ग्रहॊं का  दौरा करता है। और अकेलापन, मित्रता, प्रेम और हानि के विषयों को संबोधित करता है। 

बच्चों की किताब के रूप में इसकी शैली के बावजूद 'नन्हें राजकुमार' की यह कहानी वयस्क व्यक्ति के स्वभाव और दृष्टिकोण पर भी बात करती है।

द लिटिल प्रिंस दुनिया भर में 140 मिलियन पत्री  बेचकर सेंट एक्सप्री का सबसे सफल उपन्यास बन गया है। जो इतिहास में सबसे ज्यादा बिकने वाले उपन्यासों में से एक बन गया है।  

इस किताब का अनुवाद दुनिया भर में 505 से अधिक भाषाओं और बोलियों में किया गया है।  

यह कहानी कल्पनाओं पर आधारित है जो वयस्कों की कल्पना शक्ति पर बात करती है कि किसी प्रकार के वयस्क आकणों पर विश्वास करते हैं और कल्पनाओं को कमजोर समझते हैं।

कहानी का संक्षिप्त सार :-                

                          लेखक जब छह साल के थे तब उन्होंने एक चित्र बनाया था जिसे वे कई वयस्कों को दिखातें हैं और पुछतें हैं कि यह क्या है  पर कोई उनकी भावना को समझ नहीं पाया। जिससे निराश होकर उन्होंने चित्र बनाना छोड़ दिया। और वे एक पायलेट बन गए। वह अभी भी उस तस्वीर को अपने पास रखे हुए थे। और जो भी बुद्धिमान व्यक्ति उनसे मिलता है वह उन्हें दिखाता है। पर अब भी उसके पीछे लेखक का भाव कोई न जान पाया.

एक दिन लेखक का जहाज़ रेगिस्तान के ऊपर खसरा हो जाता है और उन्हें वहाँ उतरना पडा़। उनके पास 8 दिन तक पीने का पानी था। वह अकेला ही उसे ठीक करने का निर्णय करता है और थक कर रेत पर ही लेट जाता है

 उसे एक आवाज सुनाई देती  है। वह देखता है कि एक छोटा सा राजकुमार उसे एक भेड़ का चित्र बनाने को कह रहा था जो बी-612 नामक ग्रह से आया था। राजकुमार लेखक के चित्र के बारे में सब बता देता है

(बी-612 एक छोटा सा ग्रह है जिसमें तीन ज्वालामुखी हैं और एक गुलाब है जिसे राजकुमार बहुत प्यार करता है वहां पर कुछ खतरनाक कांटे वाले पोधे थे। जो बड़े होने पर उस ग्रह का नाश कर सकते थे। जिसके समाधान के लिए राजकुमार अलग अलग ग्रहों पर जात है और अंत में पृथ्वी पर लेखक के पास आया।) 

वह चाहता है कि भेड़ सभी खराब पौधों को खा कर खत्म कर दे। प्रिंस जब पृथ्वी पर आया तो उसे एक सांप मिला जो उसे वापस घर जाने में मदद के लिए कहता है। और उससे एक लोम भी मिलता है जो उसे समझाती है कि हमेशा जो जरूरी होता है वह आंखों से दुर होता है

यह सब प्रिंस लेखक को बताता है। प्रिंस की बातों को सुनने के बाद लेखक अपने जहाज को सही करने में लग जाता है और राजकुमार सांप से बात करने लगता है तभी सांप उसे काट लेता है और प्रिंस गिर जाता है। जब लेखक पहुँचता है तो प्रिंस को वहाँ नहीं पाता 

लेखक हमेशा अपने दोस्त को याद करता है पर वो फिर कभी उससे नहीं मिलता... 

यह किताब हमें सीखती है कि हमें यह कल्पना करना नहीं छोड़ना चाहिए  क्योंकि यह कयी चीजों को आसान बना जाती हैं।

2) हमें प्यार और अपने पन की भावना रखनी चाहिए।

3) हर चीज को आंखों से ही नहीं बल्कि मन से भी देखा जाना चाहिए। 

                                           धन्यवाद 

 ओम प्रकाश

 उत्तरकाशी 

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