The giving tree # देने वाला पेड़


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लेखक- शेल सिल्वरस्टीन
सन्-1964
द गिविंग ट्री शेल सिल्वरस्टीन द्वारा लिखित और चित्रित एक अमेरिकी बच्चों की पुस्तक है। इसका प्रकाशन 7 अक्टूबर 1964 को हार्पर एंड रो द्वारा किया गया था।
यह किताब एक सेब के पेड़ औ

यह किताब एक सेब के पेड़ और एक लड़के के जीवन की कहानी पर आधारित है।
पेड़ और लड़के की उम्र बढ़ती जा रही है पर पेड़ उसे बा उम्र लड़का कह कर ही सम्बोधित करता है। पेड़ के लड़के से निस्वार्थ प्यार करता है और वह लड़के की हर मुमकिन की मदद करता है। और उसके पास आने से खुश होता है।

कहानी का सक्षिप्त सार रूप:- कहानी कि जुड़ावात एक पेड़ से होती है जो एक लड़के से प्यार करती है। लड़का हर दिन पेड़ के पास आता है और उसका छाव में खेलता है, उस पर चढता है, उसकी टहनियों में झुकाता और सेब खाता है यह सब देख कर पेड़ भी खुश रहता था।


फिर जैसे-जैसे लड़के बड़े होते हैं वह पेड़ के साथ समय कम कर देता है। और उसका पास तभी आता है जब उसे कोई वस्तु या अन्य भौतिक चीज की आवश्यकता होती है। और पेड़ अकेला महसूस करता है।
एक दिन ब्वॉय ट्री के पास आने वाला ट्री कहता है कि आने वाले मैचों में लेडी का कहना है कि बढ़ने और खलने के लिए अब बड़ा हो गया हूं। मुझे पैसे चाहिए क्या तुम मुझे पैसे दे सकते हो। पेड़ कहता है कि मैरे पास पैसे तो नहीं है पर तुम मेरे सेब ले जाओ जिससे ग्राहक पैसे प्राप्त कर लेंगे।

 लड़का सारे सेब निकाल देता है और फाइल करता है और पेड़ खुश था।
 बोअर टाइम से ट्री के पास नहीं आया था जिससे ट्री ट्री बेहाल हो गया था।
एक दिन लड़का फिर आता है और पेड़ खुश हो जाता है और कहता है कि निम्नलिखित लड़के मेरी तानियों में हैं। पर लड़का कहता है मैं बहुत ब्यस्त हूँ। मुझे एक घर चाहिए। क्या तुम मुझे घर दे सकते हो।
पेड़ कहता है छमा करो मेरे पास घर तो नहीं है पर तुम मेरी टहनियों को ले जा कर घर बना सकते हो। और वह सब ग्रन्थों को काटकर ले जाता है। पेड़ फिर भी खुश था।

बहुत समय बाद बोएट्री के पास आया ट्री उनके आने से खुश था। ट्री फिर कहता है कि लड़का एक साथ मिलने वाले लड़के कहते हैं कि अब मैं खेलने के लिए बूढ़ा हो गया हूं।
मुझे एक नाव चाहिए जो मुझे यहां से दूर ले जाए। क्या तुम मुझे एक नाव दे सकते हो लड़के कहते हैं।
पेड़ का कहना है कि मेरे तने को लिस्ट में शामिल कर लें और अपने लिए नाव बना लो और खुश हो जाएं। लड़की को तुरंत ही काट दिया जाता है।
पेड़ लड़के की सहायता के लिए खुश था पर वह जाने से खुश नहीं था।
बहुत समय बाद बॉय एक बार फिर आता है। पेड़ कहता है छमा करो मेरे पास सिर देने के लिए कुछ नहीं है न मेरे पास सेब हैं, पर मेरे दांत सेब के लिए कमजोर हैं लड़का कहता है।

मेरे पास टहनियाँ नहीं हैं पेड़ कहते हैं। पर अब तो मैं उन पर जुने के लिए बुढ़ा हो जाता हूँ लड़का कहता है। 
मेरे पास भी नहीं है पेड़ कहते हैं। मैं उस पर चढ़ने के लिए बहुत थक गया हूँ लड़का कहता है।
पेड़ कहता है मुझे छमा करो काश मैं ईश्वर कुछ निष्कर्ष देता हूं.. .. 
मैं बहुत बूढ़ा हो गया हूँ मुझे कुछ लड़के नहीं कहते हैं। मुझे एक जगह और आराम देना चाहिए।
पेड़ कहते हैं आम पर बैठकर आराम करो.. 
तमाशा है और पेड़ बहुत खुश है..... 

पेड़ के माध्यम से लेखक मां के प्यार के रूप को देखते हैं कि किस तरह मां अपना शरीर काट कर बच्चे की इच्छा पूरी करती है.. 
                                        धन्यवाद
ओम प्रकाश

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